मां चतुर्भुजी मंदिर

कल-कल नाद करती पंडा नदी के तट पर पहाड़ की तलहट्टी में अवस्थित झारखंड के प्रसिद्ध शक्ति पीठों में शुमार मां चतुर्भुजी भगवती मंदिर आस्था व भक्ति का अनूठा संगम है

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मां चतुर्भुजी मंदिर

जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर कल-कल नाद करती पंडा नदी के तट पर पहाड़ की तलहट्टी में अवस्थित झारखंड के प्रसिद्ध शक्ति पीठों में शुमार मां चतुर्भुजी भगवती मंदिर आस्था व भक्ति का अनूठा संगम है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सोनपुरा स्टेट के राजा को स्वप्न में भगवती की मूर्ति दिखाई दी थी। साथ ही भगवती ने उन्हें अपने राज्य में स्थापित कर लोककल्याण के लिए दर्शन पूजन कराने का आदेश दिया।

दूसरे दिन सुबह राजा ने स्वप्न वाले जगह पर अपने सैनिकों के साथ पहुंचकर भैंसहट घाटी (भगवती का उद्गम स्थल)पर खुदाई कराई। वहां मां भगवती की मूर्ति मिली। मां की मूर्ति को अपने हाथी पर लादकर अपने घर के लिए चले। यह कथा प्रचलित है कि राजा जब केतार पहुंचे तब हाथी बैठ गया। काफी प्रयास के बाद भी जब हाथी नहीं उठा तो राजा ने पूरे विधि विधान के साथ मां की मूर्ति को वहीं स्थापित करा दिया। वहीं लोक कल्याण के लिए मां बिराजमान हुईं। बाद में यहां मां चतुर्भुजी का भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया है। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष नवमी से लेकर बैशाख मास की पूर्णमासी तक एक महीने तक चलने वाले मेले का भव्य आयोजन मंदिर परिसर में प्रत्येक वर्ष होता है। मेले में झारखंड सहित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार से लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होता है। वहां लोग मां का दर्शन पूजन कर खुशहाल जीवन के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद होती है पूरी: ऐसी मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। यही कारण है कि सालों भर मां के दर्शन पूजन के लिए आम व खास लोगों का आना जाना अनवरत जारी रहता है। उधर पूजा अर्चना के लिए भक्तों की हमेशा भीड़ लगी रहती है।